अँधेरा में एक रात,
न कोई मेरी साथ ...
यूंही गुज़र रहा समय,
.बिना तन्हाई की कोई उपाय...
दिल तड़पने का एहसास,
और तब ही आप आए पास...
हाँ ...
न ही मिले थे पहले,
न ही हमारे नज़रे मिले...
झुकी हुई मेरी मुह पर ,
आपने लगाए नज़र !!
आपके आवाज़ में छुपी प्यास,
लगी मुझे जब आप बड़े और पास ...
और ...
दे गए एक चुम्मा ....
हाँ...
दे गए एक चुम्मा....
और तब ही मुझे याद आई वो ध्वनी ...
टीवी पे आई वो चेतावनी ...
" कछुआ जलाओ मच्छर भगाओ"
मच्छर साला...
नींद उढा लिया...
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